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21वीं सदीं में बाल विवाह की स्थिति

By Radio Shree Dev • 18 Jun 2026, 11:48 AM


 वर्तमान में हम सभी 21वीं सदी के युग में जीवनयापन कर रहे हैं, एक ऐसा आधुनिक समय जहां तकनीकी, शिक्षा और आधुनिक विकास का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इस आधुनिक में हर किसी व्यक्ति को बोलने की आजादी है अपने हक के अधिकारों के लिए आवाज उठाने की आजादी है। इस आधुनिक समय में यूं तो कई कुरीतियों का अंत हो चुका है लेकिन फिर भी कुछ कुप्रथाओं की जड़ें समाज को ऐसे जकड़ी हुई हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेती, उनमें से एक प्रथा का नाम है बाल विवाह। 



किसी लड़की की शादी 18 वर्ष से पहले और किसी लड़के की शादी 21 वर्ष से पहले कर दी जाती है, तो उसे बाल विवाह कहा जाता है।

अक्सर लोग कहते हैं — “हमारे यहाँ तो हमेशा से ऐसा होता आया है” या“ लड़की बड़ी हो गई थी, इसलिए शादी कर दी” लेकिन सवाल ये है —

क्या शरीर का बड़ा होना, दिमाग और समझदारी के बड़े होने की गारंटी है? एक बच्चा, चाहे वह लड़की हो या लड़का, उस उम्र में अपने सपनों को पहचान ही रहा होता है, जिम्मेदारियों का बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं होता है।


यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार, आज भी दुनिया भर में होने वाले बाल विवाहों का एक बड़ा हिस्सा भारत में होता है, जिसे मिटाने के लिए भारत सरकार 'बाल विवाह मुक्त भारत' जैसे जागरूकता अभियान चला रही है। इस कुरीति के बारे में अधिक जानने या सहायता हेतु आप यूनिसेफ बाल विवाह और बाल विवाह मुक्त भारत के आधिकारिक पोर्टल देख सकते हैं


बाल विवाह का सबसे गहरा असर पड़ता है लड़कियों पर। छोटी उम्र में माँ बनना, शरीर पूरी तरह तैयार नहीं जान को खतरा, पढ़ाई छूट जाती है, सपने टूट जाते हैं, एक छोटी सी बच्ची, जो गुड़िया से खेल रही होती है, अचानक रसोई, रिश्ते और जिम्मेदारियों के बीच खो जाती है। और सबसे दुख की बात वह यह सब अपनी किस्मत मान लेती है। यह सिर्फ लड़कियों की समस्या नहीं है। लड़के भी जब कम उम्र में शादी करते हैं — पढ़ाई छोड़नी पड़ती है, कम उम्र में कमाने का दबाव, मानसिक तनाव, परिवार का बोझ।एक अधपका दिमाग

कैसे पूरे परिवार की जिम्मेदारी निभाएगा?


हम अगर सच्चाई देखें, तो बाल विवाह के पीछे कई कारण हैं: गरीब परिवार सोचते हैं —

“आज बोझ हटा दो, कल खर्च और बढ़ जाएगा”

शिक्षा की कमी जहाँ पढ़ाई नहीं, वहाँ समझ भी कम। समाज का डर “लड़की बड़ी हो गई तो लोग क्या कहेंगे?”

इसी डर में माता-पिता जल्दबाज़ी कर बैठते हैं।

परंपराएँ कुछ गलत परंपराएँ जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं।



सदियों पुरानी इस प्रथा का इतिहास बहुत गहरा है, जो मुख्य रूप से सामाजिक सुरक्षा और रुढ़िवादी परंपराओं से उपजा था। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, बाल विवाह की जड़ें प्राचीन काल में भी थीं। उस समय कम उम्र (8-10 वर्ष) में लड़कियों का विवाह कर दिया जाता था। इसके पीछे मुख्य कारण बेटियों की सुरक्षा, उनकी पवित्रता बनाए रखना और वंश की निरंतरता सुनिश्चित करना था। मध्यकाल और आक्रांताओं का प्रभाव:मध्यकाल में बाल विवाह की प्रथा का अत्यधिक विस्तार हुआ। आक्रमणकारियों के भय और अपनी बेटियों की इज्जत व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिंदू परिवारों ने कम उम्र में ही बच्चियों की शादी करना शुरू कर दिया था। सामाजिक-आर्थिक कारण उस समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) बहुत कम थी और बाल-विवाह को यह सोचकर सही ठहराया जाता था कि छोटी उम्र में ससुराल जाने से लड़कियां वहां के रीति-रिवाजों में आसानी से ढल जाएंगी।


वर्तमान में हमारे देश में बाल विवाह अपराध है। लड़की की उम्र: 18 साल से कम  गैरकानूनी है लड़के की उम्र: 21 साल से कम गैरकानूनी है। बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता, रिश्तेदार, पंडित या मौलवी सब कानून के दोषी माने जाते हैं लेकिन कानून तभी काम करेगा जब समाज साथ देगा। इसीलिए बहुत जरुरी है कि सब मिलकर काम करें और इस समस्या को जड़ से खत्म करें।


उम्मीद करते हैं कि यह लेख आपके लिए ज्ञानवर्धक रहा होगा।